कर्ज़ा देता मित्र को, वह मूर्ख कहलाए, महामूर्ख वह यार है, जो पैसे लौटाए। बिना जुर्म के पिटेगा, समझाया था तोय, पंगा लेकर पुलिस से, साबित बचा न कोय। गुरु पुलिस दोऊ खड़े, काके लागूं पाय, तभी पुलिस ने गुरु के, पांव दिए तुड़वाय। पूर्ण सफलता के लिए, दो चीज़ें रखो याद, मंत्री की चमचागिरी, पुलिस का आशीर्वाद। नेता को कहता गधा, शरम न तुझको आए, कहीं गधा इस बात का, बुरा मान न जाए। बूढ़ा बोला, वीर रस, मुझसे पढ़ा न जाए, कहीं दांत का सैट ही, नीचे न गिर जाए। हुल्लड़ खैनी खाइए, इससे खांसी होय, फिर उस घर में रात को, चोर घुसे न कोय। हुल्लड़ काले रंग पर, रंग चढ़े न कोय, लक्स लगाकर कांबली, तेंदुलकर न होय। बुरे समय को देखकर, गंजे तू क्यों रोय, किसी भी हालत में तेरा, बाल न बांका होय। दोहों को स्वीकारिये, या दीजे ठुकराय, जैसे मुझसे बन पड़े, मैंने दिए बनाय।