दिल को दिल से काम रहेगा

दोनों तरफ़ आराम रहेगा

सुब्ह का तारा पूछ रहा है

कब तक दौर-ए-जाम रहेगा

बदनामी से क्यूँ डरते हो

बाक़ी किस का नाम रहेगा

ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ ही अच्छी है

आलम ज़ेर-ए-दाम रहेगा

मुफ़्ती से झगड़ा 'अदम' कर

उस से अक्सर काम रहेगा