दिल की दिल को ख़बर नहीं मिलती जब नज़र से नज़र नहीं मिलती सहर आई है दिन की धूप लिए अब नसीम-ए-सहर नहीं मिलती दिल-ए-मासूम की वो पहली चोट दोस्तों से नज़र नहीं मिलती जितने लब उतने उस के अफ़साने ख़बर-ए-मोतबर नहीं मिलती है मक़ाम-ए-जुनूँ से होश की रह सब को ये रह-गुज़र नहीं मिलती नहीं 'मुल्ला' पे उस फ़ुग़ाँ का असर जिस में आह-ए-बशर नहीं मिलती