
सूरज के सिरहाने बैठा अँगरेज़ है,
धूप बड़ी तेज़ है, धूप बड़ी तेज़ है।
चालू-पुरजे, हरफ़न मौले चारो तरफ़,
हौले-हौले मौसम खौले चारो तरफ़,
होंठ हवा के फटना हैरतअंगेज़ है।
पाँव देख-देख किए मन उदास मोरनी,
टुकर-टुकर ताक रही प्यासी कठफोरनी,
बून्द-बून्द का क़िस्सा फिर वहशतखेज़ है।
ताप-ता
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