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धूप बड़ी तेज़ है - जयप्रकाश त्रिपाठी

सूरज के सिरहाने बैठा अँगरेज़ है, धूप बड़ी तेज़ है, धूप बड़ी तेज़ है। चालू-पुरजे, हरफ़न मौले चारो तरफ़, हौले-हौले मौसम खौले चारो तरफ़, होंठ हवा के फटना हैरतअंगेज़ है। पाँव देख-देख किए मन उदास मोरनी, टुकर-टुकर ताक रही प्यासी कठफोरनी, बून्द-बून्द का क़िस्सा फिर वहशतखेज़ है। ताप-ता
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