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दया - अशोक चक्रधर

भूख में होती है कितनी लाचारी, ये दिखाने के लिए एक भिखारी, लॉन की घास खाने लगा, घर की मालकिन में दया जगाने लगा। दया सचमुच जागी मालकिन आई भागी-भागी- क्या करते हो भैया ? भिखारी बोला भूख लगी है मैया। अपने आपको मरने से बचा रहा हूं, इसलिए घास ही चबा रहा हूं। मालकिन ने आवाज़ में मिसरी घोली, और ममतामयी स्वर में बोली— कुछ भी हो भैया ये घास मत खाओ, मेर
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