
दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-इमाँ होना
आदमियत यही है और यही इन्साँ होआ
नौ-गिरफ़्तार-ए-बला तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ क्या जानें
कोई नाशाद सिखा दे इन्हें नालाँ होना
रह के दुनिया में यूँ तर्क-ए-हवस की कोशिश
जिस तरह् अपने ही साये से गुरेज़ाँ होना
ज़िन्दगी क्या है अनासिर् में ज़हूर्-ए-तर
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