चिर्रा चिर्री चीं-चीं-चीं - जयप्रकाश त्रिपाठी's image
706K

चिर्रा चिर्री चीं-चीं-चीं - जयप्रकाश त्रिपाठी

छप्पर-छप्पर लगे सुलगने, आगबबूला दोपहरी। लपटी-कपटी राजपाट के मौसम-सी अन्धी-बहरी। भोरहरे तक चिरई-चुनमुन चिर्रा-चिर्री, चीं-चीं-चीं... याकि चुनाव चिन-चिन चटके गुर्रा-गुर्री, हीं-हीं-हीं... साँसें लगीं खींचने फिर से कनबतियाँ गहरी-गहरी। पत्ता-पत्ता तपे, छाँव के भी तलवे छाले-छाले, कौन पसीना पोंछे, मन किससे सारा दुख कह डाले, टस-स
Read More! Earn More! Learn More!