छिड़ गये साज़े-इश्क़ के गाने खुल गये ज़िन्दगी के मयख़ाने आज तो कुफ्रे-इश्क़े चौंक उठा आज तो बोल उठे हैं दीवाने कुछ गराँ1 हो चला है बारे-नशात आज दुखते हैं हुस्ने के शाने2 बाद मुद्दत के तेरे हिज्र में ‍फि‍र आज बैठा हूँ दिल को समझाने हासिले-हुस्नो-इश्क़ बस है यही आदमी आदमी को पहचाने तू भी आमादा-ए-सफ़र हो ‍फ़ि‍राक काफ़िले उस तरफ़ लगे जाने