चाँद तुम्हें देखा है पहली बार
ऐसा क्यों लगता लगता हर बार
कभी मिले फुरसत बतलाना यार,
ऐसा क्यों लगता मुझको हर बार!बादल के घूँघट से बाहर जब भी तू निकला है
मैं क्या,मेरे साथ समंदर तक मीलों उछला है,
आसन पर बैठे जोगी को जोग लगे बेकार,
चाँद तुम्हें देखा है पहली बार,
ऐसा क्यों लगता मुझको हर बार।