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चाँद निकले किसी जानिब तिरी ज़ेबाई का

चाँद निकले किसी जानिब तिरी ज़ेबाई का

रंग बदले किसी सूरत शब-ए-तन्हाई का

दौलत-ए-लब से फिर ख़ुसरव-ए-शीरीं-दहनाँ

आज अर्ज़ां हो कोई हर्फ़ शनासाई का

गर्मी-ए-रश्क से हर अंजुमन-ए-गुल-बदनाँ

तज़्किरा छेड़े तिरी पैरहन-आराई का

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