बी.ए. ओर एल-एल.बी. पढ़कर भालू हुआ वकील, फर्राटे से लंबी-चौड़ी देने लगा दलील। जैसे टहल रहा जंगल में वैसे चला कचहरी, रस्ते में ही लगी टोकने उसको ढीठ गिलहरी। बोली,‘दादा, पहले काला- कोट सिलाकर आना, तभी कचहरी जाकर तुम अपना कानून दिखाना!’ भालू हँसा ठठाकर, बोला- ‘तुमको क्या समझाऊँ, जनम लिया ही कोट पहनकर अब क्या कोट सिलाऊँ!’ -साभार: नंदन, दिसंबर 1996, 30