छज्जों और आईनों, ट्रेनों और दूरबीन कारों और पुस्तकों यानी सुविधाओं के अद्वितीय चश्मों से मुझे देखने वाले अपमानित नगरों में सम्मानित नागरिकों मुझे ध्यान से देखो जेबी झिल्लियाँ सब उतार मुझे नंगी आँखों देखो पहिचानो। मैं इस इतिहास के अँधेरे में, एक सड़ी और फूली लाश सा घिसटने वाला प्राणी कौन हूँ ओ विपन्न सदियों के प्रभुजन, सम्पन्न जन। मुझको पहिचानो कुबडे, बूढे, कोढी, दैत्य सा तुम्हारे हॉलो, शेल्फों, ड्रायर या ड्रेसिंग टेबल में छिपने वाला प्राणी मैं कौन हूँ पहिचानो, मुझको पहिचानो। मेरी इस कूबड़ को जरा पास से देखो मेरी गिलगिली पिलपिली बाँहें अपनें दास्तानों से परे अँगुलियों से महसूस करो शायद तुमने इनको ग्रीवा के गिर्द कभी पुष्प के धनुष सा भेंटा हो। मुझसे मत बिचको मुझे, घृणा की सिकुड़ी आँखों मत देखो मुझसे मत भागो। मेरे सिकुड़े टेढे ओठों पर ओठ रखो। शायद तुमने इनमे कभी किसी का पूरा माँसल अस्तित्व कहीं भोगा होगा। मेरी बह रही लार पर मत घिन लाओ यह तुम हो जो मुझसे हो कर गुजरे थे। मेरी गल रही अंगुलियाँ देखो पहचानो। क्या मेरे सारे हस्ताक्षर धुंधला गये? क्यों तुम मुझसे हरदम कटते हो? क्यों मैं तुम्हारे सपनों में आ धमकता हूँ? क्यों मैं तुम्हारे बच्चों को नहीं दिखता? तुमको ही दिखता हूँ जाओ अपने बच्चों से पूछो।