बेहद खूबसूरत थी हमारी ज़िंदगी; लेकिन अचानक एक दिन यों बदनुमा … बदरंग कैसे हो गयी? भूल कर भी; जब नहीं की भूल कोई फिर भुलावों-भटकनों में राह कैसे खो गयी? रे, अब कहाँ जाएँ, इस ज़िंदगी का रूप-रस फिर कब … कहाँ पाएँ? अधिक अच्छा यही होगा हमेशा के लिए चिर-शांति में चुपचाप सो जाएँ!