बाज़ार से आज कुछ खास ले आया हूँ मैं पहली बारीश का मज़ा ले आया हूँ लाया हूँ गरम पकौड़े, बचपन का चाव ले आया हूँ आज तो मैं साथ अपने कागज की नाव ले आया हूँ लिखूँगा ग़ज़ल कागज क़लम स्याही ले आया हूँ आज मैं सारे बचपन के सबूत गवाही ले आया हूँ बुला लिया सभी दोस्तों को सारे यार ले आया हूँ आज मैं वो ज़ुकाम और साथ बुखार ले आया हूँ हो चुका जवान पर बचपन के सारे विचार ले आया हूँ आज मैं मम्मी की डाँट और पापा की मार ले आया हूँ जवानी में घूम घूम थक चुका बड़े बड़े मालों में आज मैं ग़ल्ली मोहल्ले में लगने वाला बाज़ार ले आया हूँ