बंदूक चली, बंदूक चली! चल गई सनासन, सन-सन-सन, चल गई दनादन, दन-दन-दन। जाने किस पर, किस जगह चली, बंदूक चली, बंदूक चली! धड़-धड़ धड़ाम आई आवाज, मानो कि भरभरा गिरी गाज गूँजा स्वर घर-घर, गली-गली बंदूक चली, बंदूक चली! लड़की भड़की, लड़का भड़का, दादी का दिल धड़-धड़ धड़का। सहमी बेचारी रामकली, बंदूक चली, बंदूक चली!