मेरे बहुतों हैं बाल सखे क्यों उनसे परहेज़ रखे वो आईना हैं समाज का कहता पताका विश्वास का सच का सागर हैं वो कुदरत की कला हैं वो देखा हैं चिड़ियों को भी बात करते पौधों को भी मदद का हाथ धरते वो पौरुष्ता का पुष्प हैं मानवता का मलाल हैं।