बादर झूम झूम बरसन लागे । दामिनि दमकत चोंक चमक श्याम घन की गरज सुन जागे ॥१॥ गोपी जन द्वारे ठाडी नारी नर भींजत मुख देखन कारन अनुरागे । छीतस्वामी गिरधरन श्री विट्ठल ओतप्रोत रस पागे ॥२॥