
आया है एक शख़्स अजब आन-बान का
नक़्शा बदल गया है पुराने मकान का
तारे से टूटते हैं अभी तक इधर-उधर
बाक़ी है कुछ नशा अभी कल की उड़ान का
कालक सी जम रही है चमकती ज़मीन पर
सूरज से जल उठा है वरक़ आसमान का
Read More! Earn More! Learn More!

आया है एक शख़्स अजब आन-बान का
नक़्शा बदल गया है पुराने मकान का
तारे से टूटते हैं अभी तक इधर-उधर
बाक़ी है कुछ नशा अभी कल की उड़ान का
कालक सी जम रही है चमकती ज़मीन पर
सूरज से जल उठा है वरक़ आसमान का