लोग हैं - ऐसी हताशा में व्यग्र हो कर बैठते हैं आत्म-हत्या! या खो बैठते हैं संतुलन तन का / मन का! व हो विक्षिप्त रोते हैं - अकारण! हँसते हैं - अकारण! किन्तु तुम हो स्थिर / स्व-सीमित / मौन / जीवित / संतुलित अभी तक! वस्तुतः जिसने जी लिया संन्यास मरना और जीना एक है उसके लिए! विष हो या अमृत पीना एक है उसके लिए!