आसान नही होता कविता का बन जाना
कलम के जरिये किरदार उतरता है
पन्नों पर
और उस किरदार को
पन्नों पे उतारने के लिए
ना जाने कितने दरवाजे खोलने होते है
एक सपना एक सोच
और फिर उसके बाद का हौसलां
ख़ुद के वज़ूद को पहचानने का हुनर
और चारदीवारी में खनकती ख़ुशियों
को मुट्ठी में कैद करने का जूनून होता है
तब ज़िन्दगी खोलती है दरवाज़े
नई राहों के
जहाँ कविताएं साँस लेती है
तेरी मेरी बात करती है
और एक बदलाव की बयार
बहुत प्यार के साथ
हर शब्द का स्वागत करती है