अरे ये क्या हुआ? तुम तो बेबाक थी तो फिर ये चुपी कैसी। हाहाहा,, कुछ तो हुआ तुम्हें, ओ समझा,, कुसूर मेरा था, नहीं नहीं वक़्त ने ही रुख मोड़ा, कुसूर ना तेरा ना मेरा।। सुरवात फोटो वाली बाते , गम मे तब्दील हुई। वो फोन वाली बातें, वॉइस क्लिप पे अटक गयी। वो 'हे' का अप्रोच, "अच्छा जी"पे टंग गई। अब बेरुखी कैसी, कुछ तो बोलो ये रुखशत होना तेरा,, मायूस बना देती है नुमाइश करूँ तेरी, तौहीन होकर? बड़ा बेरुखी हो,, अब जान लोगी?।।।