कोई तो हमें चाहे गाहे-ब-गाहे! निपट सूनी अकेली ज़िन्दगी में, गहरे कूप में बरबस ढकेली ज़िन्दगी में, निष्ठुर घात-वार-प्रहार झेली ज़िन्दगी में, कोई तो हमें चाहे, सराहे! किसी की तो मिले शुभकामना-सद्‍भावना! अभिशाप झुलसे लोक में सर्वत्र छाये शोक में हमदर्द हो कोई कभी तो! तीव्र विद्युन्मय दमित वातावरण में बेतहाशा गूँजती जब मर्मवेधी चीख-आह-कराह, अतिदाह में जलती विध्वंसित ज़िन्दगी आबद्ध कारागाह! ऐसे तबाही के क्षणों में चाह जगती है कि कोई तो हमें चाहे भले, गाहे-ब-गाहे!