
कोई तो हमें चाहे
गाहे-ब-गाहे!
निपट सूनी
अकेली ज़िन्दगी में,
गहरे कूप में बरबस
ढकेली ज़िन्दगी में,
निष्ठुर घात-वार-प्रहार
झेली ज़िन्दगी में,
कोई तो हमें चाहे, सराहे!
किसी की तो मिले
शुभकामना-सद्भावना!
अभिशाप झुलसे लोक में
सर्वत्र छाय
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