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अपेक्षा - महेन्द्र भटनागर

कोई तो हमें चाहे गाहे-ब-गाहे! निपट सूनी अकेली ज़िन्दगी में, गहरे कूप में बरबस ढकेली ज़िन्दगी में, निष्ठुर घात-वार-प्रहार झेली ज़िन्दगी में, कोई तो हमें चाहे, सराहे! किसी की तो मिले शुभकामना-सद्‍भावना! अभिशाप झुलसे लोक में सर्वत्र छाय
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