
अल्ताफ़ बयाँ हों कब हम से ऐ जान तुम्हारी सूरत के
हैं लाखों अपनी आँखों पर एहसान तुम्हारी सूरत के
मुँह देखे कि ये बात नहीं सच पूछो तो अब दुनिया में
बेहोश करे हैं परियों को इंसान तुम्हारी सूरत के
आईना-रुख़ों की महफ़िल में जिस वक़्त अयाँ तुम होते ह
Read More! Earn More! Learn More!
