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आजाद आवाजें


तुम कलम तोड़ दो, किताब फाड़ दो, या सर फोड़ दो, होंठ सी दो, जुबाँ काट दो, या माइक, जबड़ा तोड़ दो, फिर भी, जहाँ पहुँचनी है, वहाँ पहुंचेगी- आजाद आवाजें!

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