
आज मुद्दत में वो याद आए हैं
दर ओ दीवार पे कुछ साए हैं
आबगीनों से न टकरा पाए
कोहसारों से तो टकराए हैं
ज़िंदगी तेरे हवादिस हम को
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आज मुद्दत में वो याद आए हैं
दर ओ दीवार पे कुछ साए हैं
आबगीनों से न टकरा पाए
कोहसारों से तो टकराए हैं
ज़िंदगी तेरे हवादिस हम को
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