
आज क्या हाल है यारब सर-ए-महफ़िल मेरा
कि निकाले लिए जाता है कोई दिल मेरा
सोज़-ए-ग़म देख न बरबाद हो हासिल मेरा
दिल की तस्वीर है हर आईना-ए-दिल मेरा
सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है
शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा
मिल गई इश्क़ में ईज़ा-तलबी से राहत
ग़म है अब Read More! Earn More! Learn More!
