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आज जरा खाली पन था

आज जरा खाली पन था 'वारिदपन'... जो शुष्क हुआ था किसी अविरल चंचल मन से, जो निश्चल था, सहज खडा था पर कुछ उम्मीद उडानों की थी स्वछन्द- गगन- उड जाने की थी किंतु , बयार-गति-सन्शय से कुछ दुबका सा था , कुछ पीछे सा था निश्चल होकर सोच रहा था, गर , स्पन्दन छोड गया ...? बीच समर रजनी तट के और... स्पन्दन छोड गया...
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