ऐ अविनाशी ! आपका, जन्म नहीं, ना नास । सदा एक निर्भय अचल, भगवत सर्व-निवास ।। भगवत सर्व-निवास विषय बानी ना मन के । नर तन धारण करो हेत हरि अपने जन के ।। गंगादास जन कहें आप सब के परकासी । भक्त वत्सली नाम भरम मेटो अविनाशी ।।