
भूमि के विस्तार में बेशक कमी आई नहीं है
आदमी का आजकल आकाश छोटा हो गया है।
हो गए सम्बन्ध सीमित डाक से आए ख़तों तक
और सीमाएं सिकुड़ कर आ गईं घर की छतों तक
प्यार करने का तरीका तो वही युग–युग पुराना
आज लेकिन व्यक्ति का विश्वास छोटा हो गया है।
आदमी की शोर से आवाज़ नापी जा रही है
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