अच्छे दिन कब आएँगे

क्या यूँ ही मर जाएँगे

अपने-आप को ख़्वाबों से

कब तक हम बहलाएँगे

बम्बई में ठहरेंगे कहाँ

दिल्ली में क्या खाएँगे

खिलते हैं तो खिलने दो

फूल अभी मुरझाएँगे

कितनी अच्छी लड़की है

बरसों भूल पाएँगे

मौत आई तो 'अल्वी'

छुट्टी में घर जाएँगे