मैं सिर झुका के हर औरत को प्रणाम करता हूँ
दिया हमे बहुत कुछ जिसने उसका सम्मान करता हूँ
हमने होते पुरे सपने और कल्पना को उड़ते देखा है
हमने कर्णप्रिय स्वरों को लता मुख से निकलते देखा है
हमने देश का भार इंदिरा के कन्धों पे संभलते देखा है
चला जब डंडा किरण का तो अच्छे अच्छों को उछलते देखा है
मिला जब प्यार टरेसा से तो पत्थर को पिघलते देखा है
स्वर कोकिला सरोजनी को दिलो पे राज करते देखा है
देते दूसरों को ख़ुशी बिना आँखों में आंसूं आंहे भरते देखा है
नर्गिस मधुबाला माधुरी श्रीदेवी से सिनेमा गुलजार होते देखा है
हिम्मत सहास से करती फतह पर्वतों को झुकते देखा है
इंसानियत को करते शर्मसार चिरागों को बुझते देखा है
दिखाते सहास करते हिम्मत और जालिमो से लड़ते देखा है
एक के लिए पुरे भारत को होते खड़े आगे बड़ते देखा है
लिए हाथों में मशाल और मोमबत्ती पिघलते देखा है
भारत की ऐसी सशक्त नारियों पे अभिमान करता हूँ
मैं सिर झुका के हर औरत को प्रणाम करता हूँ
दिया हमे बहुत कुछ जिसने उसका सम्मान करता हूँ