
अभी जज़्बा-ए-शौक़ कामिल नहीं है
कि बेगाना-ए-आरज़ू दिल नहीं है
कोई पर्दा-ए-राज़ हाइल नहीं है
सितम है वो फिर भी मुक़ाबिल नहीं है
सर आँखों पे नैरंगी-ए-बज़्म-ए-आलम
जिसे ख़ौफ़-ए-ग़म हो ये वो दिल नहीं है
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अभी जज़्बा-ए-शौक़ कामिल नहीं है
कि बेगाना-ए-आरज़ू दिल नहीं है
कोई पर्दा-ए-राज़ हाइल नहीं है
सितम है वो फिर भी मुक़ाबिल नहीं है
सर आँखों पे नैरंगी-ए-बज़्म-ए-आलम
जिसे ख़ौफ़-ए-ग़म हो ये वो दिल नहीं है
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