अब न जाने की करो बात, क़रीब आ जाओ ख़त्म होगी न ये बरसात, क़रीब आ जाओ सो न जाए कोई, चुप, करवटें बदलता हुआ आख़िरी प्यार की है रात, क़रीब आ जाओ पास रहकर भी रहें दूर उम्र भर के लिए! यह भी अच्छी है मुलाक़ात, क़रीब आ जाओ दो दिलों बीच ज़रूरत ही किसीकी क्या है! तुमसे कहनी है कोई बात, क़रीब आ जाओ फिर न लौटेंगे कभी बाग़ की डालों पे गुलाब फिर न पाओगे ये सौग़ात, क़रीब आ जाओ