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इतना आसान कहां हैं इस जहां में रहना जिंदा..!!

कविराजकविराज January 24, 2023
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एक एक तिनका ज़ोर कर आशियाना बनाता हैं परिंदा |
इतना आसान कहां हैं इस जहां में रहना जिंदा ||

सच बोलों तो गर्दन पर लटका दिए जाते हैं फांसी का फंदा |
झूठो के शहर में भला कहां चलता है सच का धंधा ||

बोझ ढोते ढोते कहां तकता है किसानों का कंधा |
नेता खुद को रोक नहीं पाता फसल पर करना धंधा ||

कहीं कोई आ कर टकरा न जाए लैंप लें कर घर से निकलना है अंधा |
समय समय पर जाती धर्म के नाम पर नेता करवातें रहता है जगह जगह पर दंगा ||

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