एक विनती है मेरी
मुझे अपने चरण का दास बना लो
मेरे राम जी
मेरे राम जी
ढूंढ रहा हूँ,
माया के, मोह विरस मे ,
मर्यादा की छांव …
ढूंढ रहा हूँ,
माया के, मोह विरस मे ,
मर्यादा की छांव …
मुझको केवट के नाव का,
पतवार बना लो
मेरे राम जी
मेरे राम जी
भटक रहा हूँ,
संसार भंवर मे
लिए वचन की ठांव…
भटक रहा हूँ,
संसार भंवर मे
लिए वचन की ठांव…
मुझको सबरी के प्रेम का
जूठा बेर बना लो
मेरे राम जी ,
मेरे राम जी …
मेरे राम जी ,
मेरे राम जी …||
