चांद ने लाल लिबास क्यों ओढा़ है,

होंठों पर सुर्ख गुलाबी नूर छोडा़ हैं।


मदहोश कर रही हैं मुझे अदायें तेरी,

रूपाक्क्षी हैं तू या हमनशींं पहरा हैं।


- अनुभव शर्मा