
मैं तुम्हें क्या देता
मेरे पास
अवसाद था
घृणा थी
उन्माद था
तृष्णा थी
क्रोध , अहंकार था
जूते थे , नाल था
और उन पर टिका हुआ
एक लिजलिजा भाल था ।
शब्द थे मगर दूसरों की भाषा बोलते थे
अनुभव ,संवेदन , संप्रेषण
सभी पाल वाली नाव की तरह डोलते थे
एक बीमार दबी - सहमी मिमीया
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