यादे सिर्फ याद न रहे,
वादे सिर्फ याद न रहे।
तुम खामोश रहो उन्हें देखकर,
तेरा उपहास न उड़े तो अच्छा है
यादे सिर्फ याद न रहे तो सच्चा है।
वादे तोड़े न जाये तो सच्चा है ,
चिंतित हु इनदिनों
अपनी व्यथा को गढ़े।
तुम्हारे चेहरे को निहारता,
उदासी तुम्हारी याद न रहे तो अच्छा है
यादे सिर्फ याद न रहे तो सच्चा है
बनने को तैयार खड़े है कई पंछी
उनमे जज्बात न हो तो अच्छा है
उरने दो इनदिनों इस नील गगन में ,
उनका उड़ जाना ही सच्चा है
यादे सिर्फ याद न रहे तो अच्छा है,
खामोश हो क्यों इनदिनों,
वारिश तो अच्छी हो रही है ,
बसंत के संग रहजाने के बाद
एहसास न हो तो अच्छा है
मरते वक्त देश मिटटी से बना
कफ़न मिल जाये तो सच्चा है।
भूल जाऊ उस छन मेरी माटी मुझे बुलाये ,
तु रोना मत मेरी माँ
देश की मिटटी से मिलने तक
तु याद आये तो सच्चा है
मरू तो इस मिटटी का कफ़न नसीब हो,
फर्ज निभाते वक्त तुझे भूल जाऊ तो अच्छा है
कवि अमन कुमार शर्मा


