आजीब बेचैनी है उनके प्यार में।

दिल लगाने से डरता है।

आप कहते हैं कि प्यार करते हैं हम

आपसे नजरे मिलाने से डरता है।

कुछ बात न हो जाए, कोई साथ न हो जाए।

दुआ करते हैं ये सनम तुम्हारी वेवफाई।

साथ ही न जाए।

डर सा लगने लगा है, तुमसे प्यार करते तो है।

आप भले रूठे हो, आपके भाईयो से डरते तो है।

अब इतनी सी बाते है कुछ इल्तिज़ा करिए।

समय बदल रहा है, प्यार का एहसास बता दिया कीजिए।

टाइम कहा है मेरे पास ये सनम

सम्मान भी छीन गए प्यार करते करते।

हालात की बाते किया न करो दिल जलता है।

पत्थर के दिल से मोम पिघलता है

हालात को समझो मुझसे अब मिला न करो।

दिल लगाने की कोशिश है तो बदनाम किया न करो।

दिल यूहीं डरा जा रहा है प्यार के मौसम में।

ऐसे छत पर आया न करो, मेरे दिल दुखाया न करो।

इल्ज़ामात अब भी कई है, तू याद आती तो है।

दिल टूटा है सही दिल को लगाती तो है।

चलो माफ किया ओ सनम तुम्हारी तन्हाई के सहारे ही जी लेंगे।

समय मिला तो प्यार का जाम भी पी लेंगे।

वेवक्त हमसे दिल लगाया न करो ।

मुझसे मिलने छत पर आया न करो।


कवि अमन कुमार शर्मा