तस्वीर जानते नहीं हो, जानो।
तुम मुझे पहचानते नहीं हो, पहचानो।
खामोश रहो मेरी खामोशी के बीच, खामोश रहो।
क्यों तुझे ईर्ष्या है मुझसे, चलो ईर्ष्या ही सही।
मै खामोश हूँ तुम्हारी ख़ामोशी पे, तुम खामोश रहो।
तमना है मुझसे मिलने की, जरूर मिलो।
खामोश रहो मेरी ख़ामोशी में, खामोश रहो।
तोड़ो न दिल मेरा ये सोच लो तुम।
चिंतित हु में, चिंतित ही रहु।
तस्वीर नहीं जानते हो, जानो।
तुम मुझे नहीं जानते तो, जानो।
सच्चाई का प्रवेक्षक, अच्छाई का पथ प्रदर्शक हूँ मै
नहीं जानते हो मुझे, खामोश रहो।
कवि अमन कुमार शर्मा


