पूछा था पथ को,
पथ होने तक।
पूछा था गाँव को,
शहर होने तक।
पूछा था पंक्षियो को,
मृत्यु की बेला तक।
पूछा था किसी से ,
नींद आने तक।
पूछा था मेघो से,
वर्षा के थम जाने तक।
पूछा था अंधकार से,
प्रकाश के आने तक।
अब पूछता हूं हररोज,
आरती के थाल लिए,
राम नाम के साथ।
ऋतुवन के बादल जाने तक।
पूछा था किसी से,
उसके आने का समय।
पूछा था जब तक जिंदा थी,
उसके मिलने का समय।
पूछा था उससे,
उसके स्वास्थ्य के बारे में।
पूछा था आज फिर,
जब उसकी याद आई।
अजीब बात हुई,
जब पूछ लिया मेरे आशुओं ने,
मेरे रोने का वजह।
पूछा था उससे,
मेरे रहने का कारण।
पूछा था हरवक्त,
पूछा था,हा पूछा था।
कवि अमन कुमार शर्मा
हिंदी प्रकोष्ठ सदस्य भागलपुर विश्वविद्यालय
सदस्य राजभाषा हिंदी बिहार सरकार
दूरभाष 7295977808,8677813813
बीहट नगर परिषद वार्ड 16,19 मध्य ।


