कुछ कवि आज भी जिन्दा है,
कुछ कवि आज भी सर्मिन्दा है।
कुछ कवि आज भी जिन्दा है।
जुल्म से लड़ने को क्रांति मशाल जलाये,
कुछ कवि आज भी जिन्दा है।
देश की आत्मा की तलाश में,
गाँवो में भटकते, पागलं का दर्जा प्राप्त कर।
कुछ कवि आज भी जिन्दा है।
हमारी विराशत को बचाये ,
कलम क्रांति की आर में।
जिवंत को देश की सत्ता के विरोध में।
जलती चिताओ के बीच संघर्ष करते,
विपदा को गले लगाए आपने खून से लिखते।
कुछ कवि आज भी जिन्दा है ,
किसान आंदोलनों को याद किये।
उनके खेतो में लहलाहते फसल की तरह
कुछ कवि आज भी जिन्दा है।
देश की नसीहत को जीत की चाह में ,
तुम्हारे , हमारे गांवों में।
देख तो लालच का चश्मा पोछ ,
तुम्हारे दिल में कलम की आग सुलगाये।
कुछ कवि आज भी जिन्दा है


