टूटू चुकी अचूक कलम भी,
और कही तन्हाई है।
चलो चले हम लौट चले अब,
सत्ता की रूश्वाई है।
संसद में है चोर ही कई,
खुनी उनकी दाढ़ी है।
पता करो तो कहा कहा पर
बहन लक्ष्मी बाई है।
देश की जनता लौट रही है,
भूख प्यास तन्हाई है।
देश में नाटक पसर चूका,
चुनाव राज्य में आयी है।
सम्बोधन, सवेदन है और कही वाहवाही है
बोलो नेता जी कैसे याद गाँव की आयी है।
आतंको से झुगी झोपड़ी
तूने क्यों उड़ाई है।
सोच रहे भूल हम चुके ,
तेरी क़यामत आयी है।
सबोधन राजयतंत्र को,
प्रजातंत्र जो लाई थी।
झूठे वादे और दिलसे,
सुला चुकी है खाई में।
बोल के थक चुके है ,
लौट रहे तन्हाई में।
समझ सको तो समझ लो यारो
चुनाव देश में जारी है।
कवि अमन कुमार शर्मा


