Kavishala
Login / Sign Up
Home
Profile
Home
Profile
Poetry
1 min
0
चश्म-ए-तर क्लब निकला आज मौसम-ए-गुल सुहाने में तजकीरा महबूब का भी तो बैठा रहा इस दिल दीवाने में जफर ये बर्ग-ए-खिजां काबिल न है अब तकल्लुफ के तुम्हारे क्यों ढक दिया इसने वो मंजर सारा जो बनाया था हमने इक जमाने में
kavayaAnjali
Aug 14, 2022
AI
Kavishala AI
Listen to this post
चश्म-ए-तर क्लब निकला आज मौसम-ए-गुल सुहाने में
तजकीरा महबूब का भी तो बैठा रहा इस दिल दीवाने में
जफर ये बर्ग-ए-खिजां काबिल न है अब तकल्लुफ के तुम्हारे
क्यों ढक दिया इसने वो मंजर सारा जो बनाया था हमने इक जमाने में
1
Join WhatsApp Community
Daily literature, poetry & stories
Read More
Earn More
Learn More