लोगों का जमघट लगा है, कोई आदमी फाँसी पर टंगा है l उतारा, पहचान की, अरे ! ये तो भोला किसान है, बस कुछ लम्हों का मेहमान है l कुछ देर बाद चिता में जलाया जायेगा, नेताओं का हुजूम उमड़ के आएगा l जो सबसे पहले आया उसका बोलबाला होगा, बाकियों का मुँह काला होगा l किसान के परिवार से करेगा सहायता के लम्बे- चौड़े वादे, वास्तव में जिनमें से पूरे होंगे आधे से भी आधे l इस तरह वह नेता गाँव का हमदर्द बन जायेगा, अगले चुनाव में एम एल ए का पद पायेगा l फिर गाँव वालों को बिजली, खाद, पानी की किल्लत देगा, और सभी किसानों का खून चूस लेगा l सोचो बिजली-खाद-पानी की किल्लत किसलिए है, अरे, चुनाव से पहले खर्च किया है इसलिए है l जो इन परेशानियों में घिर जायेगा, वो अपने मौत के दिन करीब पायेगा l इन परेशानियों में नेताओं की बाग़- बहार है, लेकिन किसानों में से फिर एक भोला तैयार है l