लोगों का जमघट लगा है,
कोई आदमी फाँसी पर टंगा है l
उतारा, पहचान की, अरे ! ये तो भोला किसान है,
बस कुछ लम्हों का मेहमान है l
कुछ देर बाद चिता में जलाया जायेगा,
नेताओं का हुजूम उमड़ के आएगा l
जो सबसे पहले आया उसका बोलबाला होगा,
बाकियों का मुँह काला होगा l
किसान के परिवार से करेगा सहायता के लम्बे- चौड़े वादे,
वास्तव में जिनमें से पूरे होंगे आधे से भी आधे l
इस तरह वह नेता गाँव का हमदर्द बन जायेगा,
अगले चुनाव में एम एल ए का पद पायेगा l
फिर गाँव वालों को बिजली, खाद, पानी की किल्लत देगा,
और सभी किसानों का खून चूस लेगा l
सोचो बिजली-खाद-पानी की किल्लत किसलिए है,
अरे, चुनाव से पहले खर्च किया है इसलिए है l
जो इन परेशानियों में घिर जायेगा,
वो अपने मौत के दिन करीब पायेगा l
इन परेशानियों में नेताओं की बाग़- बहार है,
लेकिन किसानों में से फिर एक भोला तैयार है l