"जल है एक अमूल्य निधि" मास्टर बच्चों को पढ़ाते हैं। अपने ही घर में पानी खूब बहाते हैं। बूँद-बूँद का महत्व समझा रहे हैं बच्चों को। अपने पामेरियन, लैब्राडोर सबमर्सिबल में नहाते हैं। हैण्डपम्प, सबमर्सिबल लगवाकर पानी पर अधिकार जमा रहे हैं। समझाने वाले नहीं उनको फूटी आँख सुहा रहे हैं। पानी को व्यर्थ बहाकर नालियों में, कहते हैं हँसकर। हम तो जलजीवों को पानी देकर खूब पुण्य कमा रहे हैं। पानी का महत्त्व वहाँ पूछो,जहाँ इसकी परेशानी है। रेत ही रेत मिलता है जहाँ, नहीं मिलता पानी है। इनको भेज दिया जाये यदि वहाँ पर। तब समझ आयेगा क्या पानी की कहानी है। यदि ऐसे ही पानी बहाया हमने तो जलस्रोत खाली हो जाएगा। तब पीने के लिए भी स्वच्छ जल मिलना मुश्किल हो जायेगा। अब तो खूब मिल रहा है फ्री हमें पानी। लेकिन एक दिन "जल है..... निधि" वास्तविक सच हो जाएगा।