विरहप्रीत___


आँसू बड़ी जोर से लेते हैं

उसकी याद में उबकाई..

लोग कहतें है देखो

उस पगले की आँखें भर आई..।।


मेरे मन का कोई "दोष" नही

उसकी "यादों" में होश नही

उसने मेरे तन-मन का 

छोड़ा कोई भी अवशेष नही

प्रेम अगन की गाथा में

बचता कुछ भी शेष नही..

"तिल-तिल" जलता "विगतरात"

हर आशिक़ का है "भेष" यही

उसकी ही यादों में खोए रहना

हर प्रीतम का है "देश" यही..

"भाव-शून्य" "आकार "शून्य"

हर यादों का "भेद" यही..

"विरह-गीत" इक भाव "अनोखा"

जीवन का "सच्चा" "सन्यास" यही..।।


••••••राघव