..........सुनो वैदेही
स्वप्न्न सुन्दरितकाया मुंदरितनैनों से भर-भर देती प्रेम-प्याले..।।अधर कोमलांकितहुए ह्रदय में अलंकृतयौवन्य से भर-भर देती "जीवन-प्याले"..।।आकुलित मन का "रस-धार" वहीमेरे जीवन का "सर्वाचित-सार" वही"वैदेह-प्रेम" की संरचना काहै "मूर्ति-रूप" आकार वही..।।
®aghav"