."प्रेयसी"
........."खूबसूरत" बहुत तो तुम
…….."ला-इलाज़" ख़्वाब हो तुम
"लालायित" ह्रदय का राग हो तुम..
फ़िर क्यों
............ये जो तुमने "इश्क़" किया है
........"इश्क़" है या मुझे "मर्ज" दिया है
.."धड़कनों" को ये कैसा "तर्ज" दिया है
उधार "जिंदगी" को नया "कर्ज" दिया है..।।
@राघव


