"प्रेम"
मिलन की अभिलाषा"
या त्याग की परिभाषा"
किसी का "भाव है
किसी का अभाव है
किसी की आत्म-संतुष्टि
किसी को दुख की अनुभूति
किसी को आकार मिले
किसी को विकार मिले
कोई चैन भर सोये
कोई रात भर रोये
किसी को सत्कार मिले
किसी को प्रतिकार मिले
किसी का ह्रदय शीतल "हिमखंड" बना
किसी का ह्रदय शोलों सा जलता "प्रखंड" बना
कोई निम्न" बना
कोई उच्च" बना
कोई स्वच्छ" भावनाएं रखता है
कोई हरदम कुटिल" नीति रखता है
कोई बहे स्वच्छंद समीर" सा
कोई रहे पराधीन अधीर" सा
किसी मे सुंदर" भाव जगे
किसी में मलिन" भाव पले..।।
इस कदर प्रेम किसी का "जोग" बना
इस कदर प्रेम किसी का "रोग" बना
"सुख-दुख का"
"अदभुत पैमाना"
"यह प्रेम बना" "यह प्रेम बना"..।।
@राघव


